गलतियों से कैसे सीखें? सफलता के लिए जरूरी है गलतियां करना | Motivational Speech

“गलती मत करना।”
यह शायद उन वाक्यों में से एक है जिसे हम बचपन से सबसे ज्यादा सुनते आए हैं। मां-बाप हमें गलतियां करने से रोकते हैं, शिक्षक कहते हैं कि कोई गलती नहीं होनी चाहिए और बड़े लोग हमें सावधान करते हैं कि ऐसा कुछ मत करना जिससे बाद में पछताना पड़े। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गलतियों से बचने की यह आदत हमें कहीं अंदर से कमजोर तो नहीं बना रही?

कई बार हम कोई नया काम सिर्फ इसलिए शुरू नहीं करते क्योंकि हमें डर होता है कि हमसे गलती हो जाएगी। हम असफलता से बचने के लिए कोशिश करना ही छोड़ देते हैं। लेकिन सच यह है कि गलतियों से पूरी तरह बचकर कोई इंसान न तो बड़ा बन सकता है और न ही जीवन में कुछ नया सीख सकता है। इसलिए . . 

इस लेख में हम समझेंगे कि गलतियों से कैसे सीखें, गलती करने से डरना हमारी सफलता को कैसे रोक सकता है और क्यों एक सही तरीके से की गई गलती हमारे लिए किसी किताब से भी बड़ा सबक बन सकती है।


गलतियों से कैसे सीखें?

गलतियों से सीखने का मतलब अपनी गलती को पहचानना, उसके कारण को समझना, उसके परिणाम से सबक लेना और अगली बार उसी गलती को दोहराने से बचना है। गलतियां जीवन और सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। समस्या गलती करने में नहीं, बल्कि गलती से कुछ न सीखने और उसे बार-बार दोहराने में है।


मैं गलतियां करना क्यों सिखाता हूं

हम बचपन से अपने आसपास के लोगों से सुनते आ रहे हैं कि हमें गलती नहीं करना चाहिए | मां-बाप अपने बच्चों से कहते हैं—“ये गलत है, इसे मत करना।” टीचर अपने विद्यार्थियों से कहते हैं—“ बिल्कुल सही सही लिखना, कोई गलती नहीं होनी चाहिए।” सीनियर अपने जूनियर से कहते हैं—“देखना, कोई गलती ना हो ।”

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस छोटे-से वाक्य का हमारे दिमाग पर कितना गहरा असर पड़ता है?

बचपन से बार-बार यह सुनते-सुनते हमारे मन में एक डर बैठ जाता है कि गलती करना बुरी बात है। फिर धीरे-धीरे यही डर हमारी सोच और हमारे फैसलों को प्रभावित करने लगता है। कई बार हम कोई काम शुरू करने से पहले ही सोचने लगते हैं—“अगर मुझसे गलती हो गई तो?”

और यही सवाल कई बार हमें शुरुआत करने से ही रोक देता है।

हम कोई नया काम नहीं करते, कोई नया रास्ता नहीं चुनते और कोई जोखिम नहीं लेते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हम असफल न हो जाएं या कहीं कोई गलती न हो जाए। परिणाम यह होता है कि हम अपने लक्ष्य से पीछे रह जाते हैं और हमारे भीतर मौजूद कई संभावनाएं कभी विकसित ही नहीं हो पातीं।

हम नए रास्तों की खोज करने के बजाय हमेशा उसी रास्ते पर चलना पसंद करते हैं जिस पर पहले से बहुत सारे लोग चल चुके हैं। हमें डर रहता है कि कहीं हम भटक न जाएं। इस तरह धीरे-धीरे हमारा जीवन एक निश्चित दायरे में सिमट जाता है।

लेकिन मुझे बचपन से ही गलतियाँ करना पसंद है और मैंने अपने जीवन में बहुत सारी गलतियाँ की है|अपने इसी आदत की वजह से मैंने बहुत सारी चीजें सीखी है | मेरा मानना है कि बिना गलती किए कोई भी किसी भी काम में सफल नहीं हो सकता | इसलिए मैं सबको गलतियां करना सिखाता हूं। 

 


गलतियों से बचना नहीं, उनसे सीखना जरूरी है

पिछली कई सदियों में मानव सभ्यता की प्रगति को अगर ध्यान से देखा जाए तो पाएंगे कि इंसान ने बहुत कुछ अपनी गलतियों से ही सीखा है। लेकिन आज भी हमारी सबसे बड़ी कोशिश यही रहती है कि हमसे कोई गलती न हो।

आज इंटरनेट पर अगर आप सर्च करेंगे तो आपको हजारों ऐसे सवाल मिल जाएंगे—गलतियां करने से कैसे बचें? गलतियों से बचने के उपाय क्या हैं? गलत फैसले लेने से कैसे बचें?

लेकिन मैं आपको एक बात पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं—इंसान चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, वह पूरी जिंदगी गलतियां करने से नहीं बच सकता। क्योंकि गलती करना इंसान की कमजोरी ही नहीं, उसके सीखने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा भी है।

गलतियां ही हमें बताती हैं कि क्या सही है और क्या गलत। गलतियां ही हमें अपनी कमियों का एहसास कराती हैं और हमें खुद को सुधारने का मौका देती हैं।

इसलिए मेरा मानना है कि इंसान के समुचित विकास के लिए गलतियों का होना जरूरी है। हमें गलतियों से बचने की कोशिश करने के बजाय गलतियों से सीखने की कोशिश करनी चाहिए।

मैं तो यहां तक कहता हूं—जितनी गलतियां करनी पड़ें, करो। नई-नई गलतियां करो। लेकिन एक ही गलती को बार-बार मत दोहराओ।

क्योंकि जितनी गलतियां आप करेंगे, उतना सीखेंगे। और जितना सीखेंगे, उतना ही आपके जीवन में अनुभव और समझ बढ़ेगी।

लेकिन ठहरिए।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मैं आपको जान-बूझकर गलतियां करने के लिए कह रहा हूं। जानबूझकर गलती करना समझदारी नहीं, बल्कि मूर्खता है।

मेरे कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि जब आपको किसी नए काम को लेकर यह समझ नहीं आ रहा हो कि क्या सही है और क्या गलत, तब केवल इस डर से पीछे मत हटिए कि “कहीं मुझसे गलती न हो जाए।”

क्योंकि कई बार गलती करने के बाद ही हमें पता चलता है कि सही रास्ता कौन-सा है।

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बिना गलती किए सीखना मुश्किल है

एक उदाहरण से समझिए।

मान लीजिए आपके सामने आग जल रही है और आपको पता है कि आग को छूने से आपका हाथ जल सकता है। तो जाहिर है कि आप उसे छूने की कोशिश नहीं करेंगे, क्योंकि आपको पहले से पता है कि इसका परिणाम क्या होगा।

लेकिन जब किसी चीज के बारे में आपको कुछ भी पता नहीं होता, तब अनुभव ही आपको सिखाता है कि क्या सही है और क्या गलत।

एक छोटा बच्चा जब पहली बार खड़े होकर चलने की कोशिश करता है तो क्या वह पहली कोशिश में चलना सीख जाता है?

नहीं।

वह खड़ा होता है, गिरता है, फिर उठता है। दो कदम चलता है और फिर गिर जाता है। कई बार उसे चोट भी लगती है। लेकिन वह हार नहीं मानता। वह बार-बार कोशिश करता है और हर बार अपनी पिछली गलती से कुछ सीखता है। आखिरकार एक दिन वही बच्चा बिना किसी सहारे के चलना सीख जाता है।

अब जरा सोचिए—अगर उस बच्चे के माता-पिता उससे कहते, “गिरना गलत है, इसलिए चलने की कोशिश मत करो”, तो क्या वह कभी चलना सीख पाता?

शायद नहीं।

मानव सभ्यता का विकास भी कुछ ऐसा ही है। इंसान ने अपने अनुभवों, प्रयोगों और असफलताओं से बहुत कुछ सीखा है। हमने प्रकृति को समझने की कोशिश की, नए औजार बनाए, उन्हें इस्तेमाल किया, उनमें कमियां मिलीं और फिर उन्हें बेहतर बनाया।

यानी आज जो कुछ हमें सही दिखाई देता है, उसके पीछे कभी न कभी किसी की कोशिश, असफलता और गलती जरूर रही होगी।

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हर सफलता के पीछे असफल कोशिशों की कहानी होती है

आपने थॉमस अल्वा एडिसन का नाम जरूर सुना होगा। बल्ब के विकास से जुड़ी उनकी कहानी अक्सर इस बात का उदाहरण देती है कि लगातार प्रयोग और असफलताओं के बावजूद कोशिश जारी रखना कितना महत्वपूर्ण है।

कल्पना कीजिए, अगर किसी वैज्ञानिक ने कुछ असफल प्रयोगों के बाद यह तय कर लिया होता कि “अब मैं कोई प्रयोग नहीं करूंगा, क्योंकि कहीं फिर गलती न हो जाए”, तो क्या विज्ञान इतनी तेजी से आगे बढ़ पाता?

बिल्कुल नहीं।

विज्ञान की प्रयोगशालाओं में प्रयोग होते हैं। कुछ सफल होते हैं और कुछ असफल। लेकिन हर असफल प्रयोग वैज्ञानिक को कुछ न कुछ जानकारी देता है। यही जानकारी अगले प्रयोग को बेहतर बनाने में मदद करती है।

और यही नियम हमारे जीवन पर भी लागू होता है।

आपको क्या लगता है कि स्टीव जॉब्स, बिल गेट्स और मुकेश अंबानी जैसे सफल लोगों ने अपने जीवन में कभी गलतियां नहीं की होंगी?

बिल्कुल की होंगी।

उन्होंने भी गलत फैसले लिए होंगे, असफलताओं का सामना किया होगा और कई बार ऐसी परिस्थितियों से गुजरे होंगे जब उन्हें लगा होगा कि शायद उनका फैसला गलत था। लेकिन फर्क यह था कि उन्होंने अपनी गलतियों को अपने जीवन का अंत नहीं माना।

उन्होंने गलतियों को feedback की तरह लिया।

यही कारण है कि आज हम उनकी सफलता की कहानियां सुनते हैं, लेकिन उनके रास्ते में आई हर छोटी-बड़ी गलती की कहानी हमें दिखाई नहीं देती।

इतिहास अक्सर सफलता को याद रखता है, लेकिन उस सफलता के पीछे छिपी असफल कोशिशों को भूल जाता है।

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मेरी अपनी जिंदगी ने मुझे गलतियों से क्या सिखाया?

खुद मैंने भी अपनी जिंदगी में हजारों गलतियां की हैं।

कुछ साल पहले तक मुझे बाइक चलाना नहीं आता था। मेरे दोस्तों ने कई बार मुझे बाइक चलाना सिखाने की कोशिश की, लेकिन मैं डरता था। मेरे दिमाग में हमेशा यही चलता रहता था कि कहीं मुझसे गलती न हो जाए, कहीं मैं गिर न जाऊं।

लेकिन एक बार मेरे अंकल ने मुझे ऐसी स्थिति में डाल दिया जहां मेरे पास पीछे हटने का कोई रास्ता ही नहीं था।

एक दिन वे मुझे अपनी बाइक पर पीछे बैठाकर रेलवे स्टेशन ले गए। वहां ट्रेन में बैठते समय उन्होंने मुझसे कहा—“बाइक लेकर घर चले जाओ।”

मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की कि मुझे बाइक चलानी नहीं आती। लेकिन तब तक ट्रेन चल चुकी थी।

अब मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।

मरता क्या न करता।

मैं बाइक पर बैठा और उसे लेकर घर की तरफ निकल पड़ा। स्टेशन से मेरे घर की दूरी लगभग छह किलोमीटर थी। उन छह किलोमीटर के सफर में मेरी बाइक करीब आठ-दस बार बंद हुई। दो-तीन बार मैं गिरा भी।

लेकिन किसी तरह मैं घर पहुंच गया।

और यकीन मानिए, मेरे लिए वह दिन बहुत खुशी का दिन था।

क्यों?

क्योंकि उस दिन मेरे अंदर से गलती करने का डर निकल गया था।

मुझे पहली बार एहसास हुआ कि बिना गलती किए कोई नई चीज सीखना कितना मुश्किल है। मुझे बाइक चलाना पहले से नहीं आता था, लेकिन उस दिन मैंने गलती की, गिरा, बाइक बंद हुई, फिर उठकर दोबारा कोशिश की और आखिरकार घर पहुंच गया।

इसके बाद अगले एक-दो दिनों में ही मैंने बाइक चलाना काफी अच्छी तरह सीख लिया।

उस अनुभव ने मुझे जिंदगी की एक बहुत बड़ी सीख दी—

कई बार जिस गलती से हम डरते हैं, वही गलती हमें उस डर से हमेशा के लिए आजाद कर देती है।

मैंने लोगों को पहचानने में भी बहुत गलतियां की हैं। लेकिन शायद उन्हीं गलतियों की वजह से आज मैं लोगों को समझने और पहचानने का हुनर पहले से बेहतर सीख पाया हूं।

मैंने अपनी जिंदगी में कई गलत फैसले लिए हैं। लेकिन उन्हीं गलत फैसलों ने मुझे यह समझने में मदद की कि अगली बार फैसला लेते समय किन चीजों पर ध्यान देना चाहिए।

इसलिए आज मैं यह कह सकता हूं कि मेरी हर गलती मेरे लिए एक शिक्षक रही है।

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गलती करना बुरा नहीं, गलती से न सीखना बुरा है

इसलिए मेरा मानना है कि गलती करना बुरा नहीं है।

बुरा तब है जब हम अपनी गलती को स्वीकार ही न करें।

बुरा तब है जब हम अपनी गलती के लिए हमेशा किसी दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहें।

और सबसे बुरा तब है जब हम एक ही गलती बार-बार करते रहें और फिर भी उससे कुछ सीखने की कोशिश न करें।

गलती के बाद खुद से पूछिए—

मैंने क्या गलत किया?

मुझसे यह गलती क्यों हुई?

अगली बार मैं इसे कैसे बेहतर कर सकता हूं?

अगर आपने इन तीन सवालों के जवाब ईमानदारी से खोज लिए, तो आपकी गलती बेकार नहीं गई।

बल्कि उसने आपको कुछ ऐसा सिखाया जिसकी कीमत किसी किताब, किसी डिग्री या किसी मोटिवेशनल वीडियो से नहीं मिल सकती।

अनुभव।

और अनुभव दुनिया की उन चीजों में से है जिसे खरीदा नहीं जा सकता।

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 गलतियों से डरना बंद कीजिए

तो अगर आप कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं, कोई नया हुनर सीखना चाहते हैं, अपने जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं या अपने किसी बड़े सपने की तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं, तो केवल इस डर से पीछे मत हटिए कि कहीं आपसे गलती न हो जाए।

क्योंकि अगर आप गलती से बचने के लिए कुछ करेंगे ही नहीं, तो शायद आप असफल होने से तो बच जाएंगे, लेकिन सफल होने का मौका भी खो देंगे।

याद रखिए, बच्चा गिरकर चलना सीखता है। इंसान अनुभव से समझदार बनता है। वैज्ञानिक प्रयोगों से नई खोज करते हैं और सफल लोग अपनी असफलताओं से रास्ता खोजते हैं।

इसलिए गलतियों से भागिए मत, उन्हें समझिए।

उनसे सीखिए।

उन्हें अपने खिलाफ सबूत मत बनाइए, बल्कि अपने भविष्य के लिए अनुभव बनाइए।

हां, एक बात हमेशा याद रखिए—एक ही गलती को बार-बार दोहराना सीखना नहीं है।

पहली गलती आपको अनुभव दे सकती है। दूसरी बार वही गलती आपकी लापरवाही हो सकती है। इसलिए गलती कीजिए, उससे सीखिए, खुद को सुधारिए और फिर आगे बढ़ जाइए।

क्योंकि आखिरकार—

गलतियां करना ही हमारे जिंदा होने का एक सबूत है।

मुर्दे गलती नहीं करते।

जिंदगी वही इंसान जीता है जो गिरने के बाद उठता है, गलतियों से सीखता है और फिर दोबारा कोशिश करता है।

इसलिए अगली बार जब कोई आपसे कहे—“गलती मत करना”, तो डरिए मत।

बस अपने मन में इतना कहिए—

“मैं गलती करने नहीं जा रहा हूं, मैं सीखने जा रहा हूं। और अगर रास्ते में गलती हुई, तो उससे सीखकर पहले से बेहतर इंसान बनकर लौटूंगा।”

यही जिंदगी है। यही सीखने का रास्ता है। और शायद यही सफलता की असली शुरुआत भी है।


तो दोस्तों, अब मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं—क्या आप भी गलती करने से डरते हैं?

अगर हां, तो आज से अपनी सोच बदलने की कोशिश कीजिए। गलती से डरिए मत, उससे सीखिए। क्योंकि हर गलती आपको अपने बारे में, अपनी कमजोरियों के बारे में और जिंदगी के बारे में कुछ न कुछ सिखाकर जाती है।

बस एक बात हमेशा याद रखिए—गलती करना बुरा नहीं है, लेकिन एक ही गलती को बार-बार दोहराना जरूर बुरा है।

अगर आपको यह लेख पसंद आया हो और आपको लगता है कि किसी ऐसे इंसान को इसकी जरूरत है जो असफलता या गलती के डर से कोई कदम नहीं उठा पा रहा, तो यह लेख उसके साथ जरूर शेयर करें। हो सकता है आपका एक शेयर किसी दूसरे इंसान को हार मानने से रोक दे।

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