Loan लेना आज पहले के मुकाबले बहुत आसान हो गया है। मोबाइल, बाइक, कार, घर या शादी जैसे बड़े खर्च के लिए पूरी रकम हाथ में न हो, तब भी लोन लेकर EMI के जरिए चीज तुरंत खरीदी जा सकती है। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है, जब हमारी कमाई का एक बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है और हम आर्थिक परेशानियों से घिर जाते है और उस EMI को भरने के लिए अगले कई महीनों या सालों तक हमें आर्थिक बदहाली का सामना करना पड़ता हैं |
देखिए, Loan लेना हमेशा गलत नहीं है, लेकिन बिना अपनी जिंदगी का हिसाब लगाए Loan लेना जरूर भारी पड़ सकता है। कई बार हम Loan जरूरत के लिए नहीं, बल्कि भावनाओं में ले लेते हैं—किसी महंगे फोन की इच्छा, बच्चों की जिद, समाज में अपनी इज्जत बनाए रखने का दबाव। उस समय EMI छोटी और सपना बड़ा दिखाई देता है। लेकिन कुछ महीनों बाद वही EMI घर के बजट पर भारी पड़ने लगती है।
इसलिए अगर आप लोन या कर्ज लेने का सोच रहे हैं तो आपका यह जानना जरूरी है कि लोन लेने से पहले क्या देखें? Loan लेने से पहले क्या ध्यान रखें, क्या-क्या चेक करें और EMI और Loan के ब्याज का हिसाब कैसे समझें |
लोन लेने से पहले क्या देखें ?
कई लोगों को लगता है कि बैंक से फ्री का पैसा मिल रहा है, इसलिए लोन लेते समय लोग सोचते है कि जितना मिल जाए उतना ही अच्छा है | लेकिन लोग यह नहीं सोचते कि Loan eligibility और उनकी वास्तविक financial capacity एक जैसी चीज नहीं हैं । बैंक यह देखता है कि आप उसकी शर्तों के मुताबिक कितना Loan ले सकते हैं और किस तरह चुका सकते हैं। लेकिन आपकी जिंदगी का पूरा हिसाब बैंक नहीं जानता। उसे यह नहीं पता कि अगले साल आपके बच्चे की फीस बढ़ सकती है, घर में किसी की तबीयत खराब हो सकती है, नौकरी में परेशानी आ सकती है या अचानक कोई बड़ा खर्च सामने आ सकता है।
मान लीजिए आपकी monthly income ₹50,000 है और बैंक आपको ऐसी EMI वाला Loan दे देता है जिसे आप कागज पर आसानी से चुका सकते हैं। लेकिन अगर आपके घर का जरूरी खर्च ₹30,000 है, पहले से ₹5,000 की EMI चल रही है और हर महीने कम से कम ₹5,000 बचत करनी जरूरी है, तो नई EMI लेने के बाद आपके पास कितना बचेगा?
यहीं असली हिसाब शुरू होता है।
बैंक आपकी borrowing capacity बता सकता है, लेकिन आपकी जिंदगी की affordability आपको खुद तय करनी होगी। इसलिए लोन लेने से पहले यह देखें कि आप उस loan को आसानी से चुकाने में सक्षम है या नहीं |
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Loan लेने से पहले क्या सोचें
आजकल किसी महंगी चीज की कीमत सुनकर डर कम लगता है, क्योंकि उसके साथ तुरंत EMI भी बता दी जाती है।
मान लीजिए किसी फोन की कीमत ₹80,000 है। एक साथ ₹80,000 खर्च करने की बात सुनकर शायद आप रुककर सोचेंगे। लेकिन अगर आपको बताया जाए कि इसे कुछ हजार रुपये महीने की EMI पर ले सकते हैं, तो वही खरीदारी आसान लगने लगती है।
यहीं दिमाग एक छोटा-सा खेल खेलता है।
हम कुल कीमत देखना बंद करके मासिक किस्त देखने लगते हैं।
लेकिन सही सवाल होना चाहिए:
मुझे यह चीज खरीदने के बाद कुल कितने रुपये देने होंगे?
इसके साथ ब्याज कितना जाएगा? Processing fee या दूसरे charges कितने हैं? Loan कितने समय तक चलेगा? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या इस चीज को खरीदने के बाद भी मैं हर महीने पर्याप्त बचत कर पाऊंगा?
किसी Loan की असली लागत सिर्फ EMI नहीं होती। कुल repayment और उसके कारण आपकी financial freedom पर पड़ने वाला असर भी उसकी कीमत का हिस्सा है।
“लोग क्या कहेंगे?” कई बार सबसे महंगा Loan दिलवा देता है
हमारे समाज में एक अदृश्य दबाव है—दूसरे लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे।
शादी है तो शादी शानदार होनी चाहिए। मेहमानों के खाने में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। कपड़े अच्छे होने चाहिए। सजावट ऐसी होनी चाहिए कि लोग तारीफ करें। बेटे के पास अच्छी बाइक होनी चाहिए। बेटी की शादी में अपनी हैसियत से कम नहीं दिखना चाहिए।
इन इच्छाओं में अपने आप में कोई बुराई नहीं है। हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए अच्छा चाहते हैं।
लेकिन परेशानी तब शुरू होती है जब हम अपनी जेब देखकर नहीं, दूसरे की नजर देखकर खर्च करने लगते हैं।
शादी के दिन लोग कहेंगे, “बहुत शानदार इंतजाम किया है।”
लेकिन शादी के बाद जब पांच साल तक EMI कटेगी, तब वही लोग आपके घर का बजट नहीं संभालेंगे।
समाज आपके खर्च की तारीफ कर सकता है, लेकिन आपकी EMI नहीं भरता।
यह बात थोड़ी कड़वी है, मगर अगर इसे समय रहते समझ लिया जाए तो जिंदगी की बहुत सारी परेशानियों से बचा जा सकता है।
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महंगा फोन चाहिए या अपनी जिंदगी आसान चाहिए?
आज EMI पर मोबाइल लेना बहुत आसान है। खासकर महंगे smartphones के मामले में यह सुविधा लोगों को यह महसूस करा देती है कि महंगी चीज अब उनकी पहुंच से बाहर नहीं है।
लेकिन एक सवाल पूछना जरूरी है:
क्या आपको वास्तव में उस फोन की जरूरत है, या आपको सिर्फ वह फोन चाहिए क्योंकि वह दूसरों के पास है?
अगर आपका मौजूदा फोन ठीक काम कर रहा है और नया फोन सिर्फ इसलिए चाहिए क्योंकि नया model आ गया है, तो उस खरीदारी का भुगतान आप सिर्फ पैसे से नहीं करेंगे। आप अपनी भविष्य की income का एक हिस्सा भी उस इच्छा के लिए commit कर देंगे।
यही बात बाइक, कार, महंगे कपड़े, furniture, electronics और दूसरी चीजों पर भी लागू होती है।
EMI ने “मैं इसे अभी afford नहीं कर सकता” और “मैं इसे खरीद सकता हूं” के बीच की दूरी बहुत छोटी कर दी है।
लेकिन छोटी दूरी का मतलब यह नहीं कि फैसला सही है।
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शादी हमारे समाज में सिर्फ दो लोगों का रिश्ता नहीं होती। इसमें परिवार की भावनाएं, रिश्तेदारों की उम्मीदें और सामाजिक प्रतिष्ठा भी जुड़ जाती है। इसलिए कई माता-पिता अपनी आर्थिक क्षमता से ज्यादा खर्च कर बैठते हैं।
उस समय मन में एक ही बात होती है—बच्चे की शादी जिंदगी में एक ही बार होगी, कमी नहीं रहनी चाहिए।
बात सही भी लगती है।
लेकिन शादी का दिन खत्म होने के बाद जिंदगी खत्म नहीं होती। असली जिंदगी तो उसके बाद शुरू होती है।
अगर शादी के खर्च के लिए लिया गया Loan अगले कई साल तक EMI मांगता रहे, तो वही पैसा जो बच्चों के भविष्य, घर, बचत या Emergency Fund में लगाया जा सकता था, कर्ज चुकाने में चला जाता है।
और सबसे दुखद स्थिति तब होती है जब किसी परिवार में एक व्यक्ति Loan लेता है लेकिन उसकी EMI का असर पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
एक दिन की खुशी के लिए लिया गया फैसला कई सालों की जिम्मेदारी बन सकता है।
एक सवाल:
जिस शादी में समाज के सामने इज्जत बचाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए, अगर वही पैसा अगले कई साल आपके बच्चों की जरूरतें रोक दे, आपकी बचत खत्म कर दे और परिवार के किसी सदस्य को आर्थिक रूप से तोड़ दे—तो आखिर वह इज्जत किस काम की?
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भावनाओं में लिया गया Loan सिर्फ पैसों का फैसला नहीं होता
कई बार हम सोचते हैं कि हम सिर्फ एक चीज खरीद रहे हैं।
असल में हम अपने भविष्य की कमाई का एक हिस्सा पहले ही खर्च कर रहे होते हैं।
आज Loan लेकर ₹1 लाख की चीज खरीद ली। कल salary आएगी तो उसमें से एक हिस्सा उस पुराने फैसले को चुकाने चला जाएगा। अगले महीने भी यही होगा। फिर उसके अगले महीने भी।
धीरे-धीरे हमें पता चलता है कि हमारी कमाई का एक हिस्सा पहले से ही बंधा हुआ है।
इसीलिए Loan लेने से पहले एक सवाल बहुत जरूरी है:
क्या मैं इस चीज के लिए सिर्फ आज पैसा खर्च कर रहा हूं, या आने वाले कई महीनों की अपनी आजादी भी कम कर रहा हूं?
अगर जवाब आपको असहज करता है, तो शायद खरीदारी को कुछ समय के लिए टालना ही बेहतर है।
अपनी future salary पर भरोसा करके आज Loan मत लीजिए
एक और गलती बहुत आम है।
“अभी salary ₹35,000 है, लेकिन अगले साल ₹45,000 हो जाएगी।”
“अभी business छोटा है, अगले साल income बढ़ जाएगी।”
“अभी थोड़ी परेशानी होगी, बाद में सब ठीक हो जाएगा।”
हो सकता है income सच में बढ़ जाए। लेकिन financial planning उम्मीद पर नहीं, वर्तमान क्षमता पर होनी चाहिए।
जो EMI आप आज आराम से भर सकते हैं, वही सुरक्षित है। भविष्य में income बढ़े तो अतिरिक्त पैसा Loan जल्दी चुकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
लेकिन आज की निश्चित EMI को कल की अनिश्चित income के भरोसे लेना जोखिम भरा हो सकता है।
लोन लेने से पहले क्या ध्यान रखें ?

Loan लेने से पहले सिर्फ EMI calculator देखना पर्याप्त नहीं है। एक कागज पर अपना पूरा monthly budget लिखिए।
Monthly income: ₹_____
घर का जरूरी खर्च: ₹_____
बच्चों की पढ़ाई: ₹_____
मौजूदा EMI: ₹_____
बिजली, राशन और यात्रा: ₹_____
अन्य जरूरी खर्च: ₹_____
हर महीने की बचत: ₹_____
नई EMI: ₹_____
अब सबसे जरूरी सवाल पूछिए:
नई EMI देने के बाद क्या मेरे पास Emergency के लिए पैसा बचेगा?
अगर नई EMI के बाद आपकी पूरी income लगभग खत्म हो जाती है, तो Loan शायद आपकी क्षमता से बड़ा है।
ऐसी स्थिति में Loan की रकम कम करना, खरीदारी टालना, सस्ती चीज चुनना या पहले कुछ महीनों तक बचत करना ज्यादा समझदारी हो सकती है।
Emergency Fund खत्म करके Loan मत लीजिए
मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपको ₹5 लाख की चीज खरीदनी है। आप सोचते हैं कि ₹3 लाख दे देता हूं और बाकी ₹2 लाख का Loan ले लेता हूं।
यह फैसला पहली नजर में अच्छा लग सकता है।
लेकिन अगर उन ₹3 लाख में आपकी Emergency savings भी शामिल है, तो सावधान हो जाइए।
कल नौकरी चली गई, बीमारी आ गई या घर में अचानक कोई बड़ा खर्च आ गया तो क्या होगा?
Loan की EMI चलती रहेगी, लेकिन आपकी बचत खत्म हो चुकी होगी।
इसीलिए बड़े financial decisions में Loan और Emergency Fund दोनों को साथ देखकर फैसला करना चाहिए।
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Loan लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें ?
Loan लेने से पहले खुद से तीन सवाल पूछिए:
क्या यह मेरी जरूरत है?
अगर हां, तो दूसरा सवाल:
क्या मुझे यह अभी चाहिए?
और तीसरा:
क्या मैं इसे बिना अपनी financial stability बिगाड़े afford कर सकता हूं?
कई बार इन तीन सवालों के जवाब हमें खुद बता देते हैं कि हमें Loan लेना चाहिए या नहीं।
अगर कोई चीज जरूरत नहीं है, सिर्फ इच्छा है, और उसे खरीदने के लिए कई साल EMI देनी पड़ेगी, तो थोड़ा इंतजार करना कोई हार नहीं है।
हर चीज तुरंत हासिल कर लेना financial success नहीं है। कुछ चीजों के लिए इंतजार कर पाना भी आर्थिक समझदारी है।
लोन लेने से पहले क्या-क्या चेक करें ? EMI और ब्याज का सही हिसाब समझें
Loan लेने से पहले सिर्फ यह देखना कि हर महीने कितनी EMI देनी है, काफी नहीं है। आपको यह भी समझना चाहिए कि Loan खत्म होने तक आपकी जेब से कुल कितने पैसे जाएंगे। कई बार कम EMI देखकर हमें Loan सस्ता लगता है, जबकि लंबी Loan Tenure की वजह से ब्याज के रूप में काफी ज्यादा पैसा देना पड़ सकता है।
मान लीजिए आपने ₹2 लाख का Personal Loan लिया और उसकी ब्याज दर 12% सालाना है। अगर आप इसे कम अवधि में चुकाते हैं तो आपकी EMI थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन कुल ब्याज कम रहेगा। वहीं अगर उसी Loan को ज्यादा लंबे समय के लिए लेते हैं, तो EMI कम दिखाई देगी, लेकिन पूरे Loan की अवधि में ब्याज ज्यादा देना पड़ सकता है।
इसलिए Loan लेने से पहले कम से कम इन चीजों का हिसाब जरूर लगाएं:
1. Loan Amount: वास्तव में आपको कितने पैसे की जरूरत है? जरूरत से ज्यादा Loan सिर्फ इसलिए न लें क्योंकि बैंक ज्यादा रकम देने को तैयार है।
2. Interest Rate: ब्याज दर कितनी है और वह Fixed है या Floating? यह समझना जरूरी है कि ब्याज आपके Loan की कुल लागत को कितना बढ़ाएगा।
3. EMI: हर महीने कितनी रकम देनी होगी और आपकी मौजूदा income में उसका कितना हिस्सा चला जाएगा?
4. Loan Tenure: Loan कितने महीनों या वर्षों में चुकाना है? लंबी अवधि EMI कम कर सकती है, लेकिन कुल ब्याज बढ़ा सकती है।
5. Processing Fee और दूसरे Charges: सिर्फ Interest Rate देखकर फैसला न करें। Processing Fee, documentation charges, insurance या अन्य applicable charges भी कुल लागत को प्रभावित कर सकते हैं।
6. Total Repayment: सबसे महत्वपूर्ण सवाल—Loan खत्म होने तक बैंक को कुल कितने पैसे वापस करने होंगे?
EMI का हिसाब कैसे समझें?
EMI मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करती है—Loan Amount, Interest Rate और Loan Tenure। इसलिए किसी भी Loan को समझते समय इन तीनों को एक साथ देखना चाहिए।
उदाहरण के लिए, अगर किसी Loan की EMI ₹6,000 है और अवधि 5 साल है, तो सिर्फ ₹6,000 देखकर यह मत मानिए कि Loan की कीमत ₹3.60 लाख ही है। ₹6,000 × 60 महीने करने पर कुल भुगतान ₹3.60 लाख होगा, जिसमें Loan की मूल रकम के साथ ब्याज भी शामिल हो सकता है।
इसीलिए Loan लेने से पहले EMI के साथ Total Repayment और Total Interest जरूर देखें। यही आपको बताएगा कि उस Loan की वास्तविक कीमत कितनी पड़ रही है।
और अगर किसी Loan की EMI आपकी income का इतना बड़ा हिस्सा ले रही है कि महीने के अंत में बचत या Emergency Fund के लिए पैसा नहीं बचता, तो सिर्फ इसलिए Loan मत लीजिए क्योंकि EMI technically भर सकते हैं।
सही Loan वही है जिसकी EMI आप आज ही नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में भी बिना आर्थिक तनाव के चुका सकें।
पैसे की ईज्जत करना सीखो ,वरना एक दिन बहुत पछताओगे
Loan लेने से पहले खुद से पूछें:
☐ मुझे वास्तव में कितने Loan की जरूरत है?
☐ ब्याज दर कितनी है?
☐ EMI कितनी होगी?
☐ कुल ब्याज कितना देना पड़ेगा?
☐ Total Repayment कितना होगा?
☐ Processing Fee और दूसरे charges कितने हैं?
☐ Loan चुकाने में कितने साल लगेंगे?
☐ EMI के बाद हर महीने कितनी बचत बचेगी?
☐ मेरे पास Emergency Fund है या नहीं?
☐ अगर income कुछ महीनों के लिए कम हो गई तो क्या मैं EMI चुका पाऊंगा?
Loan बुरा नहीं है, गलत तरीके से लिया गया Loan समस्या है
यह कहना भी सही नहीं होगा कि हर Loan खराब होता है।
कई बार Loan जिंदगी को बेहतर बनाने का जरिया बनता है। घर खरीदने, शिक्षा पूरी करने या business शुरू करने के लिए लिया गया सही Loan भविष्य की income और stability में मदद कर सकता है।
समस्या तब होती है जब हम कमाई से ज्यादा दिखने वाली जिंदगी जीने के लिए कर्ज लेने लगते हैं।
जरूरत के लिए लिया गया Loan और दूसरों को प्रभावित करने के लिए लिया गया Loan एक जैसा नहीं होता।
एक आपकी जिंदगी बनाने में मदद कर सकता है।
दूसरा आपकी जिंदगी की कमाई को कई साल तक अपने साथ बांध सकता है।
निष्कर्ष
तो अगली बार जब कोई आपको कहे—
“आप इतनी EMI तो आराम से दे सकते हैं।”
तो तुरंत हां मत कहिए।
घर जाइए। शांत बैठिए। अपनी income देखिए। अपने परिवार की जरूरतें देखिए। अपनी बचत देखिए। आने वाले खर्चों के बारे में सोचिए और फिर खुद से पूछिए:
“क्या मैं इस Loan को afford करता हूं, या सिर्फ इसकी EMI को?”
दोनों में बहुत बड़ा फर्क है।
क्योंकि Loan लेने के समय खुशी सिर्फ आपकी होती है, लेकिन EMI आने के बाद उसका असर पूरे परिवार पर पड़ सकता है।
समाज के लिए बड़ी शादी करने से पहले अपने परिवार का भविष्य देखिए। दूसरों को दिखाने के लिए महंगा फोन लेने से पहले अपनी savings देखिए। सिर्फ इसलिए कार मत लीजिए कि पड़ोसी के पास नई कार है।
आपको अपनी जिंदगी उन लोगों के हिसाब से नहीं चलानी है जो आपकी EMI नहीं भरेंगे।
कभी-कभी थोड़ी साधारण जिंदगी चुन लेना, थोड़ी देर से खरीदना और अपनी औकात के अंदर रहना ही सबसे बड़ी financial freedom होती है।
क्योंकि लोगों की नजर में बड़ा दिखने के लिए लिया गया Loan शायद कुछ दिनों के लिए आपकी हैसियत बढ़ा दे, लेकिन उसकी EMI आपकी जिंदगी की आजादी कई साल तक कम कर सकती है।
और अगर कभी आपको चुनना पड़े कि लोगों की नजर में बड़ी जिंदगी जीनी है या अपने परिवार के साथ आर्थिक सुकून से जीना है, तो हमेशा वह विकल्प चुनिए जिसकी कीमत आपका परिवार आने वाले वर्षों में चुका सके। क्योंकि असली अमीरी महंगी चीजों का गुलाम बनने में नहीं ,आजादी के साथ जीने में है |
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
(1) Loan लेने से पहले क्या सोचना चाहिए?
Loan लेने से पहले अपनी income, जरूरी खर्च, मौजूदा EMI, नई EMI, ब्याज और कुल repayment का हिसाब लगाना चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि Loan लेने के बाद Emergency Fund और नियमित बचत प्रभावित तो नहीं होगी।
(2) क्या बैंक जितना Loan दे, उतना लेना चाहिए?
नहीं। बैंक की Loan eligibility आपकी वास्तविक financial affordability के बराबर नहीं होती। अपनी income और परिवार की जरूरतों के हिसाब से Loan amount तय करना बेहतर है।
(3) क्या EMI पर महंगा फोन लेना सही है?
अगर फोन वास्तव में जरूरी है और EMI आपकी financial stability को प्रभावित नहीं करती, तो यह व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है। लेकिन केवल दिखावे या सामाजिक दबाव में महंगा फोन खरीदने के लिए Loan लेना आर्थिक रूप से जोखिमपूर्ण हो सकता है।
(4) क्या शादी के लिए Loan लेना सही है?
यह आपकी आर्थिक स्थिति और Loan की लागत पर निर्भर करता है। अगर शादी का खर्च आपकी क्षमता से बहुत अधिक है और Loan लेने से लंबे समय तक परिवार का budget प्रभावित होगा, तो खर्च कम करना या शादी टालना नहीं बल्कि अपनी योजना को सरल बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
(5) Loan लेना बुरा है क्या?
नहीं। घर, शिक्षा या productive business जैसे उद्देश्यों के लिए उचित Loan उपयोगी हो सकता है। समस्या तब होती है जब Loan बिना planning, दिखावे या अपनी क्षमता से अधिक खर्च के लिए लिया जाता है।
तो दोस्तों, अगर यह लेख आपको उपयोगी लगा हो, तो इसे अपने परिवार और उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो किसी बड़े Loan या EMI का फैसला लेने जा रहे हैं। हो सकता है आपकी एक शेयर की हुई बात किसी को ऐसी EMI लेने से रोक दे, जिसका बोझ उसे आने वाले कई सालों तक उठाना पड़ता। ऐसी ही practical और जिंदगी से जुड़ी financial जानकारी के लिए Life Ka Doctor से जुड़े रहें।
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लेखक के बारे में
दिनेश नीर एक सामाजिक विचारक और सामाजिक विषयों पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे अपनी लेखनी के माध्यम से जीवन, समाज, रिश्तों, आर्थिक समझ और आत्म-विकास से जुड़े उन मुद्दों को उठाते हैं, जिनका सामना आम इंसान अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में करता है।
उनकी लेखन शैली की खासियत है कि वे कठिन विषयों को भी सरल और आम बोलचाल की भाषा में समझाने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि किसी भी विषय पर सिर्फ जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पाठक को उस जानकारी को अपनी जिंदगी से जोड़कर देखने और सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है।




